Thursday, November 15, 2012

औरत का दर्द

लोग कहते हैं मर्द को दर्द नहीं होता,
 आंखों मे पानी से आंचल उसका शर्द नहीं होता,
 नारी तो पैदा होते ही घर भी सम्भाले,
 मां की खूशियों के बहाने, पराया धन होने के बहाने,
 पैदा होते ही घर के ताने,
 झेलना उसको ही है हर हालत में,
 सब कष्ट लिखे हैं नारी की किस्मत में,
 क्या कोई पूछेगा उससे! उसको दर्द नहीं होता,
 आंखों मे पानी से आंचल उसका शर्द नहीं होता,
 लोग कहते हैं मर्द को दर्द नहीं होता

जवानी आते ही महीने के वो असहनीय दिन,
 जिन्दगी गिननी आती है तो उसके वो दो पल गिन,
 राहों ने दिये घाव भले ही गहरे हैं,
 वो बोझिल कदम फ़िर भी कहां ठहरे हैं,
 किसी अजनबी के लिये जो अपनो को छोड दे,
 वो औरत होती है मर्द नहीं होता,
इसिलिये मर्द को दर्द नहीं होता,
आंखों मे पानी से आंचल उसका शर्द नहीं होता,
 लोग कह्ते हैं मर्द को दर्द नहीं होता,

 एक आत्मा को पेट में बिठाये,
 जो दर्द झेलकर नौ महीने बिताये,
 ऐसी नारी दर्द से कहां घबराती है,
लड्ती है धूप से और सुकून की की छांव लाती है,
 गमों की बारिश में भी जिस्म उसका शर्द नहीं होता,
सारे दर्द उठाये वो इसलिये मर्द को दर्द नहीं होता

, नारी तू दुखों का सैलाब है,
 तेरे दुखों को सहना मर्दों के लिये ख्वाब है,
 एक आत्मा को पेट में बिठाये,
जो दर्द झेलकर नौ महीने बिताये,
ऐसी नारी दर्द से कहां घबराती है,
 लड्ती है धूप से और सुकून की की छांव लाती है,
 गमों की बारिश में भी जिस्म उसका शर्द नहीं होता,
सारे दर्द उठाये वो इसलिये मर्द को दर्द नहीं होता,

 नारी तू दुखों का सैलाब है,
तेरे दुखों को सहना मर्दों के लिये ख्वाब है,
इसिलिये मर्द को दर्द नहीं होता|

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